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क्यों नहीं निकला गया TITANIC| Why Titanic Hasn’t Recovered in Hindi

पूरी धरती का 71% भाग पानी और 29% स्थल  भाग है।  इतने में ही हम इंसान बस्ती बस आकर अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। हमारा समंदर इतना विशाल है जिसके आगे हमारी कल्पना भी हार जाती है। इन विशालाकाय समुंदर के नीचे हजारों रहस्यमयी  जगहे  और चीज़ें हैं। इनके बारे में जानना किसी के लिए भी नामुमकिन है। इन्हीं सब रहस्यों में से एक कहानी है टाइटैनिक की।

इस जहाज के डूबने के 73 सालों तक किसी को यह पता नहीं चल पाया कि यह जहाज कहां डूबा था और किस अवस्था में मौजूद है। 15 अप्रैल 1912 को यह अनोखा जहाज डूबा था। इसके लगभग 73 सालों बाद यानी 1985 में उसे ढूंढा गया। लेकिन इसे ढूंढने के 35 सालों बाद भी इस जहाज को समंदर की गहराइयों से अभी तक निकाला नहीं जा सका है। आज की हमारी इस वीडियो में हम टाइटैनिक जहाज कैसे और क्यों डूबा था इसके बारे में बात नहीं करेंगे बल्कि यह जहाज आज भी समंदर की गहराइयों से निकाला क्यों नहीं गया इस विषय पर बात करेंगे। 

तो चलिए शुरू करते हैं टाइटैनिक जहाज कैसे और क्यों डूबा था। इसके बारे में हम सब को थोड़ा बहुत पता तो जरूर है और इस जानकारी के पीछे सबसे बड़ा हाथ है टाइटेनिक नाम की आईकॉनिक मूवी का जो सन 1997 को रिलीज हुई थी। 1912 को टाइटैनिक डूबने के बाद करीब 73 सालों तक वैज्ञानिकों ने इसे ढूंढने की जी तोड़ कोशिश की और कई सारे मिशन भी इसकी तलाश में किए गए। लेकिन किसी को भी कोई सफलता हासिल नहीं हुई।

आखिरकार सन  1985 में एक आर्कोलॉजी और एक अमेरिकन नेवी ऑफिसर रॉबर्ट और बेल टाइटेनिक को ढूंढने के मिशन पर निकल पड़े और उन्हें टाइटेनिक अभी कहां है और किस हालत में है इसके बारे में पता चला। उनके टाइटेनिक को ढूंढने के बाद इसके कई राजो  से पर्दा उठा दिया। जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। टाइटेनिक समंदर के 12000 फीट गहराइयों में डूबा था।

ऑफिशियल रिपोर्ट के मुताबिक यह जहाज डूबने से पहले सही सलामत थी, लेकिन जैसे-जैसे टाइटेनिक समंदर की गहराइयों में समाधि गई वैसे वैसे जहाज दो हिस्सों में टूट गया, लेकिन ऐसा क्यों हुआ? टाइटेनिक द न्यू एविडेंस की रिपोर्ट में यह बताया गया कि टाइटेनिक आइसबर्ग से टकराने के बाद नहीं डूबी थी। टाइटेनिक में आग लगने की वजह से यह डूबा    था   khojio  को जब भी जहाज  का मलबा मिला तब उन्होंने यह पाया कि इसमें मौजूद बहुत सी चीजें वैसे की वैसी ही है। इस जहाज को बाहर निकालने की बहुत कोशिश की गई। लेकिन सायद सब लोग यह जान गए थे कि इसे वापस बाहर निकाल पाना नामुमकिन है।

आज की एडवांस टेक्नोलॉजी की मदद से भी टाइटेनिक को निकाला नहीं जा सका है और यह समंदर की गहराई में आज भी मौजूद है। आमतौर पर किसी भी जहाज को समुंदर के नीचे से जेसे निकाला जाता है टाइटेनिक उस तरीके से निकाल पाना मुमकिन नहीं है क्योंकि यह दो हिस्सों में टूट कर डूबा था, लेकिन हाईटेक सबमरीन  और पावरफुल मैग्नेटिक सिस्टम की मदद से शायद उसे निकालने की कोशिश की जा सके। पर इन कामों में बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, जिसमें सबसे पहला है टाइटेनिक का वजन जो करीब 1.43 लाख  टन  है जो बहुत ही ज्यादा है

और इसके बाद आता है पानी का दबाव। जो जहाज के वजन  को और भी कई गुना बढ़ा देता है। टाइटेनिक जिस जगह डूबी थी, उस जगह की गहराई बहुत ज्यादा है और उस जगह से मात्र 1 स्क्वायर फीट की किसी भी चीज को सतह तक लाने के लिए करीब 393 किलो न्यूटन फोर्स की जरूरत पड़ेगी। लेकिन वैज्ञानिक आज तक इतनी पावरफुल magnetiy सबमरीन  बना नहीं पाए हैं जो इतनी आसानी से इतनी गहराई से टाइटेनिक को बाहर निकाल सके।

शुरुआत में वैज्ञानिकों के पास टाइटेनिक बाहर निकालने का कोई प्लान नहीं था। इसलिए उन्होंने कई मजेदार तरीके ट्राई किए। टाइटेनिक को बाहर निकालने के लिए जिसमें सबसे पहला पिंग पोंग बॉल की मदद से टाइटेनिक को रिकवर करने का प्लान सोचा जी हां दोस्तों आपने बिल्कुल सही सुना। पिंग पोंग बॉल- वैज्ञानिकों ने यह तरकीब लगाए कि वह डूबे टाइटेनिक जहाज में पिंग पोंग बॉल भर देंगे ताकि यह बोल ऊपर की तरफ दबाव डालें और ऐसे करके सबमरीन या फिर बड़े मैग्नेट की मदद से जहाज को बाहर निकालना मुमकिन हो, लेकिन तब वैज्ञानिकों के दिमाग में यह बात नहीं आई की यह पिंग पोंग बॉल समंदर की गहराइयों तक जाते ही पानी के दबाव से फट जाएंगे

तब वैज्ञानिकों ने बड़े ballons  की मदद से उस  काम को अंजाम देने की परिकल्पना की। उन्होंने यह सोचा कि अगर हजारों लाखों बलूंस में हिलियम गैस भर कर इन बलून्स को  उस जहाज से बांध दिया जाए। तभी यह बलूंस ऊपर की तरफ दबाव डालेंगे और ऐसे  करके टाइटेनिक को निकाला जा सकेगा। लेकिन तब वैज्ञानिकों ने यह नहीं सोचा कि इतने गहरे पानी में इन बलूंस में हिलियम गैस कैसे भरी जाएगी और यह भी एक फ्लॉप आईडिया था।

आखिरकार वैज्ञानिकों ने यह तरकीब लगाई कि बर्फ  की डेंसिटी पानी की तुलना में कम होती है और जिस लिए बर्फ पानी में तैरता है। उन्होंने यह सोचा कि टाइटेनिक जिस जगह पर मौजूद है, अगर किसी भी तरह उस जगह के पानी को बर्फ में तब्दील कर दिया जाए तो ऐसे करने से जहाज पानी के ऊपर तक आ जाएगा।  इस तरकीब  को बताया अमेरिका के एक इंजीनियर जॉन पीएनएन उन्होंने अपनी रिसर्च में यह बताया कि इसमें अधिक मात्रा में लिक्विड नाइट्रोजन की जरूरत पड़ेगी और यह आइडिया बहुत ही कमाल का था, लेकिन ब्रिटिश गैस कंपनी बीएसई के मुताबिक इस प्रोजेक्ट को अंजाम देने में करीब आधे मिलियन टन  लिक्विड नाइट्रोजन की आवश्यकता होगी और तभी से इतने विशाल मात्रा में लिक्विड नाइट्रोजन को इतनी गहराई तक कैसे ले जाया जाएगा और अंत में यह प्रोजेक्ट भी कामयाब नहीं हो सका।

इसके बाद एक शिप बिल्डिंग कंपनी ने टाइटेनिक को निकालने का एक आईडिया दिया। उनके मुताबिक सबसे पहले टाइटेनिक पे जमे शैवाल  को और गंदगी को साफ करना पड़ेगा और इसके लिए एक पावरफुल वैक्यूम क्लीनर जैसे मशीन की जरूरत होगी। इसके बाद एक मजबूत लोहे की मोटी तार से टाइटैनिक बोट से जोड़ देना पड़ेगा और बाकी का काम यह मशीन ही कर देगा पर एक ऐसी सबमेरीन  का जुगाड़ करना पड़ेगा जिसका टैंक गैस से  फुल हो।

इतना ही नहीं इस प्रोजेक्ट के लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी। रिसर्चरों  के मुताबिक इस प्रोजेक्ट को अंजाम देने के लिए 20 मिलियन किलोवाट बिजली की जरूरत होगी और इस बिजली की उत्पादन के लिए एक पावर प्लांट की भी जरूरत है। लेकिन समस्या यह थी कि समंदर की इस गहराई में पावर प्लांट कैसे बनाया जाए। वैज्ञानिको ने  फ्लोटिंग पावर प्लांट बनाने के बारे में भी सोचा पर इतनी गहराई में इलेक्ट्रिक वायर टिक नहीं पाएगी। पानी के  अधिक दबाव से यह वायर  फट जाएगी। कैसे भी करके अगर इस प्रोजेक्ट को अंजाम दे भी दिया गया तो फिर भी यह प्रोजेक्ट काफी महंगी साबित होगी

इसलिए इस प्रोजेक्ट को तुरंत बंद कर दिया गया। बहुत सी  बड़ी-बड़ी कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट को अंजाम देना चाहा पर इसमें इतना खर्च है किसके बारे में नहीं सोचना ही बेहतर है क्योंकि टाइटेनिक को बाहर निकालने में कितना खर्च है उस पैसे की रिकवरी करना नामुमकिन के बराबर है। इसी कारणवश इस बात को कोई भी अंजाम  नहीं देना चाहता।

अगर कोई कंपनी ईसे निकालकर म्यूजियम में रख भी  भी दे तो भी इसमें किए गए खर्च को रिकवर  करने में 100 साल से भी ज्यादा का समय लग जाएगा। हालांकि इस अनोखे जहाज से लोगों की इमोशंस  जुड़ी है, लेकिन फिर भी कोई कंपनी इतना बड़ा रिस्क लेना नहीं चाहती। वैज्ञानिकों के मुताबिक बैक्ट्रिया ने इसके मलबे को खोखला कर दिया है और आने वाले कुछ सालों में यह बैक्टीरिया टाइटेनिक को पूरी तरह तहस-नहस कर देंगे।

सिर्फ  इतना ही नहीं टाइटेनिक बहुत सी सामुद्रिक मछलियों का घर बन चुका है। इसलिए यूनेस्को ने साल 2001 में टाइटैनिक को अंडर वाटर कल्चरल हेरिटेज प्रोटेक्टट्ेड  साइड डिक्लेअर  कर दिया है। कहा जाता है कि इस जहाज को निकालने में जितना खर्चा होगा उतने पैसे में दूसरी और भी बेहतर जहाज खरीदी जा सकती है।

और कोई भी कंपनी ऐसी बेवकूफी करना नहीं चाहेगी। वैसे तो इस जहाज को कभी समंदर की गहराइयों से बाहर नहीं निकाला जा सकता और अगर यह जहाज ऐसे समंदर में आने वाले दिनों में भी टिकी रही तो हमारी आने वाली नस्ले bhi iski रहस्यमयी  गाथाओं को जान पाएगी। दोस्तों आज के लिए बस इतना ही उम्मीद करते हैं। आज की हमारी यह वीडियो आप लोगों को पसंद आई हो तो फिर मिलते हैं। आपके साथ अगले वीडियो में अगर यह वीडियो आप लोगों को अच्छा लगा। आप इस वीडियो को लाइक कमेंट और ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करें। वीडियो देखते रहने के लिए शुक्रिया।