X

अंटार्टिका मे खोजी गए रहस्यमयी चीजे | Amazing Facts About Antarctica

Antarctica महादेश  दुनिया का  ऐसी जगह है जहाँ आपको दो ATM मशीन्स देखने को मिल जाएगा। ऐसे ही अजीबोगरीब चीजों से यह महादेश भरा पड़ा है। यहां का तापमान इतना कम होने के बावजूद यहां ऐसे 400 lacs है जो कभी जमता ही नहीं और ना तो  कोई टाइम जोन है और ना ही इस महादेश पर किसी और कंट्री का कोई अधिकार है।

यह जगह देखकर ऐसा लगता है कि ये  मानो किसी और ही प्लेनेट का हिस्सा है। पूरा महादेश बर्फ से ढका होने के चलते शायद आपको लग रहा होगा की यह जगह हमेशा से ही बर्फ  से ढका  हुआ था। लेकिन सच्चाई तो कुछ और ही है। आज से करीब 16 करोड़ साल पहले यह एक सुपरकॉन्टिनेंट का हिस्सा था। मतलब जब  एशिया, अफ्रीका और यूरोप जैसे सारे महादेश आपस में जुड़े हुए थे और तबकी गर्मी  आज के मुकाबले काफी ज्यादा हुआ करता था, लेकिन समय के साथ सुपरकॉन्टिनेंट एक दूसरे से अलग हो गया। दरहसल अलग इसलिए हुआ था क्युकी धरती के निचे जो टैक्टोनिक प्लेट्स है  वह हर वक्त मोमेंट करता रहता है। अब यह मूवमेंट इतना धीरे होता है कि हमें पता भी नहीं चलता और इसमें काफी लंबा समय निकल जाता है । तो इसीलिए एंटार्कटिका को करीब 12 करोड़ साल लग गए पूरी तरह से बर्फ  में कन्वर्ट होने में।

जब दो जियोलॉजीस्ट adom asworth और एडम luice यहां की सूखे  जमीनों में खुदाई की तक उन्हें कुछ पत्तियों के पौधे के जीवाश्म मिले जो करीब दो करोड़ साल पुराना था और यह इस बात का सबूत है कि यहां भी कभी पेड़ पौधे हुआ करते थे। अगर यह सुनकर आपको अजीब लग रहा है तो थोड़ा रुक जाइए क्योंकि 2018 में यहां बहुत ही लंबी खोपड़ी वाले इंसानों के कंकाल पाए गए और ठीक ऐसी ही लंबी खोपड़ी इससे पहले इजिप्ट और पैरु  में मिला था जिससे यह साफ पता चलता है कि अतीत में अंटार्कटिका के साथ अफ्रीका और साउथ अमेरिका  का कोई ना कोई कनेक्शन जरूर था। एंटार्कटिका को धरती के ऊपर से देख कर ऐसा लगता है कि यह जगह चारों तरफ से सिमिट्रिक या समान है, लेकिन हकीकत में यहां का ईस्ट अंटार्टिका  वेस्ट  एंटार्कटिका से 10 गुना ज्यादा बडा  है और यहां पर बर्फ भी वेस्टर्न  पार्ट से 10 गुना ज्यादा है।  और साथ ही दोनों लोकेशन के हाइट मैं भी काफ़ी अंतर है। 


लेकिन दूसरी तरफ यही ईस्ट  अंटार्कटिका में एक छोटा सा हिस्सा जहां बिल्कुल भी बर्फ  नहीं है और इस छोटे से हिस्से को भूलिन्स वैली  के नाम से बेहतर जाना जाता है। और इस bhulins वैली को देखकर  ऐसा लगता है जैसे मानो यह धरती नहीं बल्कि मार्स  या  मंगल ग्रह हो।

मार्स  प्लेनेट से याद आया साल  2002 में एक छोटे पत्थर के साइज का उल्कापिंड किसी एंटार्कटिका में आ गीरा था जो 2015 में कुछ साइंटिस्ट को मिला। इसके बाद यह पता चला की  यह उल्कापिंड और कहीं नहीं बल्कि खुद मंगल ग्रह से आया था। आप सुनकर हैरान हो जाएंगे, लेकिन 90% मेटोरइतस जो  धरती में पाए जाते हैं वह सब हमें अंटार्कटिका में ही मिलता है। पिछले 50 सालों में 10,000 से ज्यादा उल्कापिंड इसी  महादेश में पाया गया है जिसमें से कुछ उल्कापिंड करीब 700000 साल पुराना है।

इसी उल्कापिंड के बारिश से डायनासोर का अंत हुआ था। यह तो हम सब जानते हैं। 80s ke टाइम साइंटिस्ट को कई जानवरों के जीवाश्म इसी  अंटार्कटिका में मिले जिसमें से ज्यादातर करीब सात करोड़ साल पुराना था जो कुछ बड़े पुराने पक्षी और पानी में रहने वाले मरीन क्रिएचर थे जैसे कि मुजासॉरस  और प्लेसियोसोरस। जिससे यह साफ पता चलता है कि एक टाइम था जब एंटार्कटिका मै डायनासोर्स राज करते थे और तब एंटार्कटिका का लोकेशन भी प्रशांत महासागर के दक्षिण पश्चिमी हिस्से में मौजूद था, जिससे तापमान भी आज के मुकाबले काफी गर्म होता था। यहां साइंटिस्ट को अपना शरीर गर्म रखने के लिए   विस्की    जैसे ड्रिंक का सहारा लेना पड़ता है तो इसी अंटार्कटिका में व्हिस्की के दो बक्से बर्फ में जमे हुए पाए गए थे, जो करीबन 100 साल पुराना था। आर्कियोलॉजिस्ट को जब यह   do bakse        मिले तब उन लोगों ने इस bakse  को वहां से हटाना सेफ   नहीं समझा क्योंकि वह लोग नहीं चाहते थे कि किसी भी तरह से यह  baksa    टूटे।  इसीलिए   उन लोगों ने कई सालों तक इंतजार की।

जब तक उस   bakse   को खोलने वाले जरूरी सामान वहां ना पहुंच जाए, उसके बाद जब उन दो बक्सो  को खोला गया, उसमें से केवल 10 बोतल्स ही  बिल्कुल सुरक्षित पाए गए क्योंकि तापमान इतना कम था कि बॉटल के अंदर सारे licuid barf में जमे हुए थे। इसीलिए उन बॉटल्स को defrost  करके टेंपरेचर इनक्रीस किया गया।

आज के समय एंटार्कटिका जिस जगह पर मौजूद है वहां जाने के लिए आपको अर्जेंटीना या फिर दुनिया का सबसे दक्षिणी शहर kunta aronas, chili  से जहाजों के जरिए जाना होगा जिसके लिए भी आपको कम से कम 10 दिन से लेकर 3 हफ्तों तक का समय लग जाएगा।  साल 1940 मैं  एंटार्कटिका जाने के लिए दो जहाजों को चुना गया था। उनके इस मिशन का मकसद  था इस बर्फीले   जमीन के एक साइड से लेकर दूसरे साइड तक पहुंचना इस मिशन के लीडर philendar एक जहांज़ ke डिस्को मॉडल को समुद्र के अंदर  चला रहे थे और दूसरा जहांज़  अरोड़ा वह समुद्र के बीच से गुजर रहा था, लेकिन बदकिस्मती से endorance   यानी जिस जहां को सेट एल्टन चला रहे थे वह
Antarctica  के  barf  मे बुरी तरह से fas gaya tha। 

जिसके चलते इस जहाज को रास्तो के बीच में ही छोड़ना पड़ा और क्रू के सभी लोग लाइफ़  बोट  की मदद से किसी तरह जमीन पे  आ पहुंचे और इन लोगों को अंटार्कटिका के इस island से रेस्क्यू करने हेतु एक रेस्क्यू  टीम भेजा गया जिसको यहां पहुंचने में 17 महीने लग गए क्योंकि तब 19s के  टाइम ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम उतना ही फास्ट नहीं था। खुशकिस्मती से बर्फ के इस रेगिस्तान मे फसे 28 लोग ही सुरक्षित रूप से अपने घर पहुंच पाए थे।

What is inside the snow of antarctica

लेकिन वो andorance  जहाज उसी बर्फ की चादरों में हमेशा के लिए फस गया। इस जहांज़  को खोजने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन फंडिंग की कमी के कारण यह जहांज़  अब  तक नहीं मिल पाया। लेकिन इसी साल 2020 में हुए एक अभियान के दौरान पहली बार  अंटार्कटिका के नीचे AUV का जहाज इस्तेमाल होगा। AUV यानि ऑटोनोमस अंडरवाटर वेहिकल  जो यहां बैठ के नीचे पानी के अंदर से ऑटोमेटिकली ऑपरेट होगा और ANDAWARECE जहाज  को ढूंढने की कोशिश करेगा और क्या पता शायद 100 साल पुराने जहाजों के बचे खुचे अवशेष हमें मिल भी सकता है। 

इसी समुद्र  कि 1100 फीट की गहराई में एक अजीबोगरीब देखने वाले जीव  के कंकाल मिले। ताज्जुब की बात तो यह है कि यह जीव देखने में इतना ही अजीब था की  इसके लुक से लेकर shapes  तक कुछ भी आजकल के जीवो से मेल नहीं खा रहा था। इसे देखकर ऐसा लगता है  मानो किसी और ही प्लेनेट का जीव एलियन था जो किसी तरह अंटार्कटिका में पहुंच गया। 

Mysterious things found in antarctica in hinda